13 ट्रक गेहूं का असली अपराधी कौन
13 ट्रक गेहूं का असली अपराधी कौन
प्रशासन असली अपराधी बचाने को मजबूर नजर आ रहा है जांच की कड़ियां इधर-उधर घूमा कर प्रशासन मुख्य अपराधी को बचाने का कार्य कर रहा है जैतमाल स्वसहायता सहायता समूह कारीगोही इसकी कहानी शुरू होती है खरीदी केंद्र लेने की प्रक्रिया के साथ खरीदी केंद्र इसको गलत नियम के तहत दी गई जिस तरह से शिवम सिंह का कहना है कि ₹300000 लेकर समिति दी गई इसी के साथ साबित होता है समिति का पहले से ही भ्रष्टाचार का प्रारूप तैयार कर लिया गया था उसे प्रारूप के तहत किसी भी तरह पैसा देकर खरीदी केंद्र लेना था अब समझिए कि इसमें शामिल हुए उसे समय के dso नागेंद्र सिंह के सहमति हुई ले देकर ओर बीना जिला कलेक्टर के अनुमति के कोई भी खरीदी केंद्र नहीं दिया जाता तो जिला कलेक्टर अनुराग वर्मा ने क्यो नही किया फाईल का अवलोकन
इसी के साथ साबित होता है कि जिला कलेक्टर की भी भूमिका संदेश के घेरे में है नहीं तो जाएत माल सहायता समूह को खरीदी केंद्र नही मिलता अगर उसके पूरे रिकॉर्ड देखे जाते तो निश्चित ही पता चला कि यन ओ सी डीएम नान से दी गई जो सही नहीं थी वहीं एक नियम है कि स्व सहायता समूह 3 साल पुराना होना चाहिए पर इस बात का भी ध्यान नहीं रखा गया इससे यह साफ साबित होता है कि यह कहानी पहले ही गढ़ ली गई थी इसीलिए रजिस्ट्रेशन भी पहले से करवा लिए गए थे इस प्रक्रिया में सबसे बड़े अपराधी तो वह है जिन्होंने खरीदी केंद्र का आवंटन किया खरीदी केंद्र का आवंटन करने के समय पर ही सारे रूप रेखा तय थी और सभी सामिल थे सब को मालूम था इसीलिए सारे नियम कानून तक में रखकर खरीदी केंद्र दिया गया
जब पोल लगी खुलना तो गिन्नी लगी बाटने
वही हालत है पुरानी कहावत है कि जब पोल खोलने लगी तो सिन्नी बटना शुरू हो जाती है वहीं अधिकारियों ने खुद को बचाव में करने के लिए अन्य अधिकारियों को फसाने का काम किया जा रहा है बात सही है कि यह सारे अधिकारी भी उसे प्रक्रिया में शामिल थे पर इस बात से नहीं नकारा जा सकता कि कहीं ना कहीं जिला कलेक्टर की भी भूमिका सन्देह के घेरे में है नहीं तो कारीगैोई जेत माल स्वत स्वहता समूह को ही खरीदी केंद्र ना दिया जाता तो शायद ऐसा ना होता पर आपको बता दें कि पूरे जिले में जितने भी खरीदी केंद्र अगर सब की जांच की जाए तो निश्चित ही बहुत बड़ा घोटाला सामने आएगा क्यो की खरदी केंद्र का आवंटन ही भरस्टाचार की पहली सीढ़ी है बिना लें दें के ही खरीदी केंद्र मिलते है और बिगत कई वारसॉ से मीडिया सोसल मीडिया आवाज उठता आया पर सुनता कोन
कई वेयरहाउस का हमने बार-बार मीडिया प्रशासन को आगाह भी कराया पर प्रशासन इन सब से साथ रख कर कर छोटी मछलियों को प्रताड़ित करने का काम कर रहा है जबकि इन पर पूरे जिले में मिलर टूटा चावल जमा कर रहा है जो गरीबों को जाएगा साडाअभी सडा है क्योंकि मिलर ओर बेयर हाउस अपना खेल खेल रहे है यहां तक कि सूत्र बताते है की बेयर हाउस में पानी का छिड़काव भी होता है सूत्रों की माने तो फुरताल बेयर हाउस अमकुई को देखा जा सकता है पर समय कहा जाच हो तो परिणाम निश्चित चौकने वाले होंगे इसी लिए चावल सड़े होते है और गरीब जनता इन्ही चावलों को खाने को मजबूर है
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